नारी शक्ति की प्रबोधिनी, नक्षत्र-पुरुषों के वर्चस्व को ललकारती संपूर्ण मंदाकिनी, तेजस्विनी । तेजस्विनी । - इं• सुणीत सिज़रिया भोपाल

तेजस्विनी 
 
तेजस्विनी ।
नारी शक्ति की प्रबोधिनी,
नक्षत्र-पुरुषों के वर्चस्व को ललकारती संपूर्ण मंदाकिनी,
तेजस्विनी ।तेजस्विनी ।
 
अंतरिक्ष में भी विजय पताका लहराती हुई,
नारी के अबला से सबला होने का प्रमाण देती हुई,
गगनचुंबी शिखरों को छूने का दम्भ भरती हुई,
नारी शौर्य का परिचय देती हुई रणक्षेत्र की संचालिनी,
तेजस्विनी । तेजस्विनी ।
 
पदकमलिनी से सिरमौर तक का सफर तय करती हुई,
श्मशानों की चिर शांति से निकलकर कोलाहल में भी अपनी आवाज मुखरित करती हुई,
नारी को भोग का साधन समझने वालों को मुंहतोड़ जवाब देती हुई,
सिंहों के झुंड में सर्वप्रथम गर्जना करती हुई नारी सिंहनी,
तेजस्विनी । तेजस्विनी ।
 
आनंद के  क्षितिज तक पहुंचाने वाली उल्लासिनी,
कभी उमा-रमा-सरस्वती के रूप में जग की पालनहारिनी,
तो कभी दुर्गा के रूप में जग संहारिनी,
कभी समुद्र के ज्वार की तरह उग्र तो कभी नदी की शांत धारा की तरह छल-छल, कल-कल करती प्रवाहिनी,
हृदयवासिनी,
तेजस्विनी ।  तेजस्विनी ।
 
सादर स्वरचित-
इं• सुणीत सिज़रिया भोपाल

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