क्या गोवंश की रक्षा का समाधान गौशाला है। - प्रमोद पुजारी

*क्या गोवंश की रक्षा का समाधान गौशाला है।*
आज पूरे प्रदेश में सड़कों पर गोवंश आवारा घूमता नजर आ रहा है प्रदेश सरकार द्वारा गौशालाओं का भी निर्माण कराया गया है किंतु संख्या के आधार पर गौशालाओं में पर्याप्त जगह ना होने के कारण गोवंश अपनी दुर्दशा के लिए सड़कों पर घूम रहा है।
पूर्व काल से ही गोवंश की रक्षा एवं उनके पालन पोषण हेतु प्रत्येक गांव में एक निश्चित कृषि भूमि गाय एवं पालतू जानवरों के चरने एवं घूमने के लिए चरनोई के नाम से आरक्षित रहती थी आज भी पूरे प्रदेश में 5% कृषि भूमि चरनोई के नाम से दर्ज है लेकिन दुर्भाग्य है प्रत्येक गांव में प्रत्येक शहर में चरनोई की भूमि पर अनाधिकृत लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है जिसको हटाने की जवाबदारी संबंधित तहसीलदार की है किंतु इस भ्रष्टाचार के युग में संबंधित तहसीलदारों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा जिस कारण से अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।
राज्य शासन द्वारा समय-समय पर भू राजस्व संहिता में संशोधन कर चरनोई भूमि पर अवैध अतिक्रमण पर बाजारू मूल्य का 25 परसेंट तक अर्थदंड लगाने का प्रावधान किया गया है लेकिन आज दिनांक तक किसी भी मामले में शासन की दरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है ना ही किसी प्रखंड में सिविल की कार्रवाई की गई है स्थिति स्पष्ट है कारण भी आप सभी समझते हो ऐसी स्थिति में गोवंश की रक्षा करना ना तो सरकार के बस में है ना समाजसेवियों के बस में हैं अतः सभी से निवेदन है अपने अपने गांव की चरनोई की भूमि मुक्त कराने हेतु एक मुहिम चलाई जाए तभी कुछ हो पाएगा।
      *इस मुहिम में आपके सहयोग का आकांक्षी हूं आपसे केवल एक निवेदन है कृपया अपने मोबाइल से सीएम हेल्पलाइन 181 पर अपने ग्राम की चरनोई की भूमि को मुक्त कराने हेतु एक कॉल करने का कष्ट करें। आपका एक कॉल गौरक्षार्थ मील का पत्थर साबित होगा।*
आपकी कृपा का आकांक्षी
प्रमोद पुजारी

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